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सूरा 79

Those who drag forth

سُورَةُ النَّازِعَاتِ

An-Naazi'aat · मक्का

कुंजियाँ: J अगला अया · K पिछला अयाह

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  1. 1

    بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلنَّٰزِعَٰتِ غَرْقًۭا

    लिप्यंतरण: Wan naazi 'aati gharqa

    गवाह है वे (हवाएँ) जो ज़ोर से उखाड़ फैंके,

  2. 2

    وَٱلنَّٰشِطَٰتِ نَشْطًۭا

    लिप्यंतरण: Wan naa shi taati nashta

    और गवाह है वे (हवाएँ) जो नर्मी के साथ चलें,

  3. 3

    وَٱلسَّٰبِحَٰتِ سَبْحًۭا

    लिप्यंतरण: Wass saabi-haati sabha

    और गवाह है वे जो वायुमंडल में तैरें,

  4. 4

    فَٱلسَّٰبِقَٰتِ سَبْقًۭا

    लिप्यंतरण: Fass saabi qaati sabqa

    फिर एक-दूसरे से अग्रसर हों,

  5. 5

    فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًۭا

    लिप्यंतरण: Fal mu dab-bi raati amra

    और मामले की तदबीर करें

  6. 6

    يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ

    लिप्यंतरण: Yawma tarjufur raajifa

    जिस दिन हिला डालेगी हिला डालनेवाले घटना,

  7. 7

    تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ

    लिप्यंतरण: Tatba'u har raadifa

    उसके पीछ घटित होगी दूसरी (घटना)

  8. 8

    قُلُوبٌۭ يَوْمَئِذٍۢ وَاجِفَةٌ

    लिप्यंतरण: Quloobuny-yau maaiziw-waaji-fa

    कितने ही दिल उस दिन काँप रहे होंगे,

  9. 9

    أَبْصَٰرُهَا خَٰشِعَةٌۭ

    लिप्यंतरण: Absaa ruhaa khashi'ah

    उनकी निगाहें झुकी होंगी

  10. 10

    يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ

    लिप्यंतरण: Ya qoo loona a-inna lamar doo doona fil haafirah

    वे कहते है, "क्या वास्तव में हम पहली हालत में फिर लौटाए जाएँगे?

  11. 11

    أَءِذَا كُنَّا عِظَٰمًۭا نَّخِرَةًۭ

    लिप्यंतरण: Aizaa kunna 'izaa man-nakhirah

    क्या जब हम खोखली गलित हड्डियाँ हो चुके होंगे?"

  12. 12

    قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًۭا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌۭ

    लिप्यंतरण: Qaalu tilka izan karratun khaasirah.

    वे कहते है, "तब तो लौटना बड़े ही घाटे का होगा।"

  13. 13

    فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ

    लिप्यंतरण: Fa inna ma hiya zajratuw-waahida

    वह तो बस एक ही झिड़की होगी,

  14. 14

    فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ

    लिप्यंतरण: Faizaa hum biss saahirah

    फिर क्या देखेंगे कि वे एक समतल मैदान में उपस्थित है

  15. 15

    هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ

    लिप्यंतरण: Hal ataaka hadeethu Musaa

    क्या तुम्हें मूसा की ख़बर पहुँची है?

  16. 16

    إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى

    लिप्यंतरण: Iz nadaahu rabbuhu bil waadil-muqad dasi tuwa

    जबकि उसके रब ने पवित्र घाटी 'तुवा' में उसे पुकारा था

  17. 17

    ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ

    लिप्यंतरण: Izhab ilaa fir'auna innahu taghaa.

    कि "फ़िरऔन के पास जाओ, उसने बहुत सिर उठा रखा है

  18. 18

    فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ

    लिप्यंतरण: Faqul hal laka ilaa-an tazakka.

    "और कहो, क्या तू यह चाहता है कि स्वयं को पाक-साफ़ कर ले,

  19. 19

    وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ

    लिप्यंतरण: Wa ahdi yaka ila rabbika fatakh sha

    "और मैं तेरे रब की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ कि तु (उससे) डरे?"

  20. 20

    فَأَرَىٰهُ ٱلْءَايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ

    लिप्यंतरण: Fa araahul-aayatal kubra.

    फिर उसने (मूसा ने) उसको बड़ी निशानी दिखाई,

  21. 21

    فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ

    लिप्यंतरण: Fa kazzaba wa asaa.

    किन्तु उसने झुठला दिया और कहा न माना,

  22. 22

    ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ

    लिप्यंतरण: Thumma adbara yas'aa.

    फिर सक्रियता दिखाते हुए पलटा,

  23. 23

    فَحَشَرَ فَنَادَىٰ

    लिप्यंतरण: Fa hashara fanada.

    फिर (लोगों को) एकत्र किया और पुकारकर कहा,

  24. 24

    فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ

    लिप्यंतरण: Faqala ana rabbu kumul-a'laa.

    "मैं तुम्हारा उच्चकोटि का स्वामी हूँ!"

  25. 25

    فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْءَاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ

    लिप्यंतरण: Fa-akha zahul laahu nakalal aakhirati wal-oola.

    अन्ततः अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की शिक्षाप्रद यातना में पकड़ लिया

  26. 26

    إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةًۭ لِّمَن يَخْشَىٰٓ

    लिप्यंतरण: Inna fee zaalika la'ibratal limaiy-yaksha

    निस्संदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए बड़ी शिक्षा है जो डरे!

  27. 27

    ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا

    लिप्यंतरण: A-antum a shaddu khalqan amis samaa-u banaaha.

    क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन कार्य है या आकाश को? अल्लाह ने उसे बनाया,

  28. 28

    رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا

    लिप्यंतरण: Raf'a sam kaha fasaw waaha

    उसकी ऊँचाई को ख़ूब ऊँचा करके उसे ठीक-ठाक किया;

  29. 29

    وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا

    लिप्यंतरण: Wa aghtasha lailaha wa akhraja duhaaha.

    और उसकी रात को अन्धकारमय बनाया और उसका दिवस-प्रकाश प्रकट किया

  30. 30

    وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ

    लिप्यंतरण: Wal arda b'ada zaalika dahaaha.

    और धरती को देखो! इसके पश्चात उसे फैलाया;

  31. 31

    أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا

    लिप्यंतरण: Akhraja minha maa-aha wa mar 'aaha.

    उसमें से उसका पानी और उसका चारा निकाला

  32. 32

    وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا

    लिप्यंतरण: Wal jibala arsaaha.

    और पहाड़ो को देखो! उन्हें उस (धरती) में जमा दिया,

  33. 33

    مَتَٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْ

    लिप्यंतरण: Mataa'al lakum wali an 'aamikum.

    तुम्हारे लिए और तुम्हारे मवेशियों के लिए जीवन-सामग्री के रूप में

  34. 34

    فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ

    लिप्यंतरण: Fa-izaa jaaa'atit taaam matul kubraa.

    फिर जब वह महाविपदा आएगी,

  35. 35

    يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَٰنُ مَا سَعَىٰ

    लिप्यंतरण: Yauma Yata zakkarul insaanu ma sa'aa.

    उस दिन मनुष्य जो कुछ भी उसने प्रयास किया होगा उसे याद करेगा

  36. 36

    وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ

    लिप्यंतरण: Wa burrizatil-jaheemu limany-yaraa.

    और भड़कती आग (जहन्नम) देखने वालों के लिए खोल दी जाएगी

  37. 37

    فَأَمَّا مَن طَغَىٰ

    लिप्यंतरण: Fa ammaa man taghaa.

    तो जिस किसी ने सरकशी की

  38. 38

    وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا

    लिप्यंतरण: Wa aasaral hayaatad dunyaa

    और सांसारिक जीवन को प्राथमिकता दो होगी,

  39. 39

    فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ

    लिप्यंतरण: Fa innal jaheema hiyal maawaa.

    तो निस्संदेह भड़कती आग ही उसका ठिकाना है

  40. 40

    وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ

    लिप्यंतरण: Wa ammaa man khaafa maqaama Rabbihee wa nahan nafsa 'anil hawaa

    और रहा वह व्यक्ति जिसने अपने रब के सामने खड़े होने का भय रखा और अपने जी को बुरी इच्छा से रोका,

  41. 41

    فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ

    लिप्यंतरण: Fa innal jannata hiyal maawaa

    तो जन्नत ही उसका ठिकाना है

  42. 42

    يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا

    लिप्यंतरण: Yas'aloonaka 'anis saa'ati ayyaana mursaahaa

    वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते है कि वह कब आकर ठहरेगी?

  43. 43

    فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ

    लिप्यंतरण: Feema anta min zikraahaa

    उसके बयान करने से तुम्हारा क्या सम्बन्ध?

  44. 44

    إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ

    लिप्यंतरण: Ilaa Rabbika muntahaa haa

    उसकी अन्तिम पहुँच तो तेरे से ही सम्बन्ध रखती है

  45. 45

    إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا

    लिप्यंतरण: Innamaaa anta munziru maiy yakshaahaa

    तुम तो बस उस व्यक्ति को सावधान करनेवाले हो जो उससे डरे

  46. 46

    كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا

    लिप्यंतरण: Ka annahum Yawma yarawnahaa lam yalbasooo illaa 'ashiyyatan aw duhaahaa

    जिस दिन वे उसे देखेंगे तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) बस एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे है

अनुवाद संस्करण: hi.farooq

श्लोक ऑडियो: मिश्री रशीद अलाफसी (islamic.network CDN के माध्यम से 128kbps)।

पाठ और अनुवाद: api.alkuran.cloud · उथमानी अरबी।

यदि आयत का अर्थ स्पष्ट नहीं है, तो किसी योग्य शिक्षक से पूछें - विशेष रूप से कानूनी और धार्मिक मामलों के लिए।

Those who drag forth — Islam Word