कुंजियाँ: J अगला अया · K पिछला अयाह
- 1
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِنَّآ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦٓ أَنْ أَنذِرْ قَوْمَكَ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ
लिप्यंतरण: Innaaa arsalnaa Noohan ilaa qawmihee an anzir qawmaka min qabli any yaatiyahum 'azaabun aleem
हमने नूह को उसकी कौ़म की ओर भेजा कि "अपनी क़ौम के लोगों को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनपर कोई दुखद यातना आ जाए।"
- 2
قَالَ يَٰقَوْمِ إِنِّى لَكُمْ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌ
लिप्यंतरण: Qaala yaa qawmi innee lakum nazeerum mubeen
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ
- 3
أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ
लिप्यंतरण: Ani'udul laaha watta qoohu wa atee'oon
कि अल्लाह की बन्दगी करो और उसका डर रखो और मेरी आज्ञा मानो।-
- 4
يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
लिप्यंतरण: Yaghfir lakum min zunoobikum wa yu'akhkhirkum ilaaa ajalim musammaa; innaa ajalal laahi izaa jaaa'a laa yu'akhkhar; law kuntum ta'lamoon
"वह तुम्हें क्षमा करके तुम्हारे गुनाहों से तुम्हें पाक कर देगा और एक निश्चित समय तक तुम्हे मुहल्लत देगा। निश्चय ही जब अल्लाह का निश्चित समय आ जाता है तो वह टलता नहीं, काश कि तुम जानते!"
- 5
قَالَ رَبِّ إِنِّى دَعَوْتُ قَوْمِى لَيْلًۭا وَنَهَارًۭا
लिप्यंतरण: Qaala rabbi innee da'awtu qawmee lailanw wa naharaa
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मैंने अपनी क़ौम के लोगों को रात और दिन बुलाया
- 6
فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَآءِىٓ إِلَّا فِرَارًۭا
लिप्यंतरण: Falam yazid hum du'aaa 'eee illaa firaaraa
"किन्तु मेरी पुकार ने उनके पलायन को ही बढ़ाया
- 7
وَإِنِّى كُلَّمَا دَعَوْتُهُمْ لِتَغْفِرَ لَهُمْ جَعَلُوٓا۟ أَصَٰبِعَهُمْ فِىٓ ءَاذَانِهِمْ وَٱسْتَغْشَوْا۟ ثِيَابَهُمْ وَأَصَرُّوا۟ وَٱسْتَكْبَرُوا۟ ٱسْتِكْبَارًۭا
लिप्यंतरण: Wa inee kullamaa da'awtuhum litaghfira lahum ja'alooo asaabi'ahum fee aazaanihim wastaghshaw siyaabahum wa asaarroo wastakbarus tikbaaraa
"और जब भी मैंने उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपने कानों में अपनी उँगलियाँ दे लीं और अपने कपड़ो से स्वयं को ढाँक लिया और अपनी हठ पर अड़ गए और बड़ा ही घमंड किया
- 8
ثُمَّ إِنِّى دَعَوْتُهُمْ جِهَارًۭا
लिप्यंतरण: Summa innee da'aw tuhum jihaara
"फिर मैंने उन्हें खुल्लमखुल्ला बुलाया,
- 9
ثُمَّ إِنِّىٓ أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًۭا
लिप्यंतरण: Summaa inneee a'lantu lahum wa asrartu lahum israaraa
"फिर मैंने उनसे खुले तौर पर भी बातें की और उनसे चुपके-चुपके भी बातें की
- 10
فَقُلْتُ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارًۭا
लिप्यंतरण: Faqultus taghfiroo Rabakam innahoo kaana Ghaffaaraa
"और मैंने कहा, अपने रब से क्षमा की प्रार्थना करो। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील है,
- 11
يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًۭا
लिप्यंतरण: Yursilis samaaa'a 'alaikum midraaraa
"वह बादल भेजेगा तुमपर ख़ूब बरसनेवाला,
- 12
وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَٰلٍۢ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّٰتٍۢ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَٰرًۭا
लिप्यंतरण: Wa yumdidkum bi am waalinw wa baneena wa yaj'al lakum Jannaatinw wa yaj'al lakum anhaaraa
"और वह माल और बेटों से तुम्हें बढ़ोतरी प्रदान करेगा, और तुम्हारे लिए बाग़ पैदा करेगा और तुम्हारे लिए नहरें प्रवाहित करेगा
- 13
مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًۭا
लिप्यंतरण: Maa lakum laa tarjoona lillaahi waqaaraa
"तुम्हें क्या हो गया है कि तुम (अपने दिलों में) अल्लाह के लिए किसी गौरव की आशा नहीं रखते?
- 14
وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا
लिप्यंतरण: Wa qad khalaqakum at waaraa
"हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न अवस्थाओं से गुज़ारते हुए पैदा किया
- 15
أَلَمْ تَرَوْا۟ كَيْفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبْعَ سَمَٰوَٰتٍۢ طِبَاقًۭا
लिप्यंतरण: Alam taraw kaifa khalaqal laahu sab'a samaawaatin tibaaqaa
"क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस प्रकार ऊपर तले सात आकाश बनाए,
- 16
وَجَعَلَ ٱلْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًۭا وَجَعَلَ ٱلشَّمْسَ سِرَاجًۭا
लिप्यंतरण: Wa ja'alal qamara feehinna nooranw wa ja'alash shamsa siraajaa
"और उनमें चन्द्रमा को प्रकाश और सूर्य का प्रदीप बनाया?
- 17
وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ نَبَاتًۭا
लिप्यंतरण: Wallaahu ambatakum minal ardi nabaataa
"और अल्लाह ने तुम्हें धरती से विशिष्ट प्रकार से विकसित किया,
- 18
ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًۭا
लिप्यंतरण: Summa yu'eedukum feehaa wa ukhrijukum ikhraajaa
"फिर वह तुम्हें उसमें लौटाता है और तुम्हें बाहर निकालेगा भी
- 19
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ بِسَاطًۭا
लिप्यंतरण: Wallaahu ja'ala lakumul arda bisaataa
"और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया,
- 20
لِّتَسْلُكُوا۟ مِنْهَا سُبُلًۭا فِجَاجًۭا
लिप्यंतरण: Litaslukoo minhaa subulan fijaajaa
"ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।"
- 21
قَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِى وَٱتَّبَعُوا۟ مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارًۭا
लिप्यंतरण: Qaala Noohur Robbi innahum 'asawnee wattaba'oo mal lam yazid hu maaluhoo wa waladuhooo illaa khasaara
नूह ने कहा, "ऐ मेरे रब! उन्होंने मेरी अवज्ञा की, और उसका अनुसरण किया जिसके धन और जिसकी सन्तान ने उसके घाटे ही मे अभिवृद्धि की
- 22
وَمَكَرُوا۟ مَكْرًۭا كُبَّارًۭا
लिप्यंतरण: Wa makaroo makran kubbaaraa
"और वे बहुत बड़ी चाल चले,
- 23
وَقَالُوا۟ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّۭا وَلَا سُوَاعًۭا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًۭا
लिप्यंतरण: Wa qaaloo laa tazarunna aalihatakum wa laa tazarunna Waddanw wa laa Suwaa'anw wa laa Yaghoosa wa Ya'ooqa wa Nasraa
"और उन्होंने कहा, अपने इष्ट-पूज्यों के कदापि न छोड़ो और न वह वद्द को छोड़ो और न सुवा को और न यग़ूस और न यऊक़ और नस्र को
- 24
وَقَدْ أَضَلُّوا۟ كَثِيرًۭا ۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَٰلًۭا
लिप्यंतरण: Wa qad adalloo kasee ranw wa laa tazidiz zaalimeena illaa dalaalaa
"और उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट॥ किया है (तो तू उन्हें मार्ग न दिया) अब, तू भी ज़ालिमों की पथभ्रष्टता ही में अभिवृद्धि कर।"
- 25
مِّمَّا خَطِيٓـَٰٔتِهِمْ أُغْرِقُوا۟ فَأُدْخِلُوا۟ نَارًۭا فَلَمْ يَجِدُوا۟ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارًۭا
लिप्यंतरण: Mimmaa khateee' aatihim ughriqoo fa udkhiloo Naaran falam yajidoo lahum min doonil laahi ansaaraa
वे अपनी बड़ी ख़ताओं के कारण पानी में डूबो दिए गए, फिर आग में दाख़िल कर दिए गए, फिर वे अपने और अल्लाह के बीच आड़ बननेवाले सहायक न पा सके
- 26
وَقَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى ٱلْأَرْضِ مِنَ ٱلْكَٰفِرِينَ دَيَّارًا
लिप्यंतरण: Wa qaala Noohur Rabbi laa tazar 'alal ardi minal kaafireena daiyaaraa
और नूह ने कहा, "ऐ मेरे रब! धरती पर इनकार करनेवालों में से किसी बसनेवाले को न छोड
- 27
إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا۟ عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓا۟ إِلَّا فَاجِرًۭا كَفَّارًۭا
लिप्यंतरण: Innaka in tazarhum yudil loo 'ibaadaka wa laa yalidooo illaa faajiran kaffaaraa
"यदि तू उन्हें छोड़ देगा तो वे तेरे बन्दों को पथभ्रष्ट कर देंगे और वे दुराचारियों और बड़े अधर्मियों को ही जन्म देंगे
- 28
رَّبِّ ٱغْفِرْ لِى وَلِوَٰلِدَىَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِىَ مُؤْمِنًۭا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارًۢا
लिप्यंतरण: Rabbigh fir lee wa liwaa lidaiya wa liman dakhala baitiya mu'minanw wa lil mu'mineena wal mu'minaati wa laa tazidiz zaalimeena illaa tabaaraa
"ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे और मेरे माँ-बाप को भी और हर उस व्यक्ति को भी जो मेरे घर में ईमानवाला बन कर दाख़िल हुआ और (सामान्य) ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को भी (क्षमा कर दे), और ज़ालिमों के विनाश को ही बढ़ा।"
अनुवाद संस्करण: hi.farooq
श्लोक ऑडियो: मिश्री रशीद अलाफसी (islamic.network CDN के माध्यम से 128kbps)।
पाठ और अनुवाद: api.alkuran.cloud · उथमानी अरबी।
यदि आयत का अर्थ स्पष्ट नहीं है, तो किसी योग्य शिक्षक से पूछें - विशेष रूप से कानूनी और धार्मिक मामलों के लिए।